हिमाचल सरकार ने जारी की बंदरो को ज़िंदा मरने की अधिसूचना
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आज, हम उन बेज़ुबानों के लिए आपकी मदद चाहते हैं, जो स्वयं इसके लिए नहीं पूछ सकते क्योंकि हिमाचल सरकार व प्रशासन की सोच यह है कि रीसस मकाक प्रजाती के बंदर खेतीबाड़ी की पैदावार पर संकट है उनको मारने की मंजूरी केंद्र सरकार ने दे दी है। केवल निजी भूमी में नुकसान करने पर ही बंदरों को मारा जा सकता है। सरकारी भूमी में बंदरों को नहीं मारा जा सकेगा।
यह दुनिया के सभी पशु प्रेमियों और पशु कार्यकर्ताओं के लिए बहुत दुर्भाग्यपूर्ण खबर है।

भारत की पौराणिक कथाओं में पशु नायक की तरह, भगवान हनुमान जी का अपना वास्तविक जीवन है, अपने पौराणिक आयाम को देखते हुए, बंदर व लंगूरों को भारत के कई हिस्सों में पवित्र माना जाता है, जिन्होंने धर्म, साहित्य और कला में ऐसे कल्पनाशील चरित्रों को प्रेरित किया है और फिर भी हम भगवन स्वरूप बंदरो व लंगूरो को दरिंदे मान रहे हैं। एक तरफ तो सरकार व राजनेता राम मंदिर बनाने के लिए काम कर रहे हैं और दूसरी तरफ वे अनजान बनकर निर्दोष बंदरों को ज़िंदा मारने का फैसला ले रहे हैं।
भारतीय राजनितिक विकल्प पार्टी (बी.आर.वी.पी) पशु संरक्षण, मानव अधिकार व प्राकृतिक विकास के लिए दिन रात काम कर रही है|
लॉक डाउन होने की वजह से लोगो तक ये खबर नहीं पहुंच पायी और जिसके कारण इसका भुगतान बेचारे बंदरो को झेलना पड़ेगा वोट बैंक को बढ़ाने के लिए नेता व राजनेताओ ने सरकारी अफसरो पर दबाव बनाकर ये आर्डर पास कराया जिससे किसानो में हमदर्दी पैदा हो और किसानो को अन्धकार मैं डालकर उनको भी पाप का भागी बनाया, क्यूंकि हम सभी जानते है की हमारे किसान भाई बहन भगवान् हनुमान जी को कितना मानते है, तो साथिओ बताइये हम इस अनर्थ को कैसे होने दें|
भारतीय राजनीतिक विकल्प पार्टी(बी.आर.वी.पी.) आप सभी से अनुरोध करती है आप सभी इस पेटिशन को साइन करें, फिर हम आप सभी के हस्ताक्षरों को सरकार तक लेकर जाएंगें और पूरी कोशिश करेंगे की इस सरकारी आर्डर को रोका जा सके
परोपकारी बनो एवं प्रभु श्री राम का सानिध्य प्राप्त करो !
प्रभु हर जीव में चेतना रूप में विद्यमान है अतः प्राणियों से प्रेम करो !
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